टिकट नहीं मिला तो कांग्रेस दफ्तर से 300 कुर्सियां उठा ले गए विधायक।

देश में इस समय चुनावी माहौल है और चुनाव प्रचार जोर पकड़ता जा रहा है. साथ ही कई जगहों पर लोकसभा टिकटों का बंटवारा हो रहा है. लेकिन महाराष्ट्र में लोकसभा का टिकट कटने से बेहद नाराज कांग्रेस विधायक अब्दुल सत्तार ने अपने समर्थकों की मदद से मंगलवार को पार्टी के स्थानीय कार्यालय से 300 कुर्सियां ही उठवा लीं.

हर बार की तरह इस बार भी लोकसभा चुनाव को लेकर हर दल में टिकटों के दावेदारों की लंबी फौज है

जिनको टिकट मिल जाता है वो तो खुश हो जाते हैं, लेकिन जिन्हें टिकट नहीं मिलता वो नाराज होने के साथ-साथ बागी भी हो जाते हैं. कई दफा तो ऐसे बागी नेता पार्टी छोड़ देते हैं या फिर निर्दलीय दावेदारी ठोककर अपनी पार्टी को परेशानी में डाल देते है. लेकिन एक नेता ऐसा भी है जिनका टिकट कटा तो वो नाराज होकर पार्टी के ऑफिस से कुर्सियां उठवा ले गया.

देश में इस समय चुनावी माहौल है और चुनाव प्रचार जोर पकड़ता जा रहा है

साथ ही कई जगहों पर लोकसभा टिकटों का बंटवारा हो रहा है. लेकिन महाराष्ट्र में लोकसभा का टिकट कटने से बेहद नाराज कांग्रेस विधायक अब्दुल सत्तार ने अपने समर्थकों की मदद से मंगलवार को पार्टी के स्थानीय कार्यालय से 300 कुर्सियां उठवा लीं.

महाराष्ट्र के औरंगाबाद के सिलोद विधानसभा क्षेत्र से विधायक अब्दुल सत्तार ने कहा

विधायक अब्दुल सत्तार ने कहा कि वे पार्टी छोड़ चुके हैं और उन्होंने दावा किया कि कुर्सियों पर उनका मालिकाना हक है. ऑफिस में कुर्सियां नहीं होने की वजह से कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दफ्तर में हुई. सत्तार को उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें औरंगाबाद सीट से लोकसभा का टिकट देगी, लेकिन इस सीट पर विधानपरिषद सदस्य सुभाष झंबाद को टिकट दे दिया गया जिससे सत्तार शायद नाराज हो गए.

आजतक की ओर से सवाल पूछे जाने पर कि आप कुर्सियां क्यों ले गए

इस पर कांग्रेस विधायक अब्दुल सत्तार ने कहा, ‘मेरा सामान था तो मेरा ले जाना सही है.’ उनका गुस्सा इस कदर था कि वो अपने समर्थकों के साथ एक-दो कुर्सी नहीं बल्कि 300 कुर्सियां उठा ले गए. विधायक सत्तार का कहना है कि उन्होंने पार्टी छोड़ दी है. उन्होंने यह दावा भी किया कि कुर्सियां उन्हीं की थीं.

विधायक सत्तार तो टिकट काटे जाने के बाद पार्टी के ऑफिस से कुर्सियां उठा ले गए

लेकिन ऐसे कई नेता हैं जो टिकट नहीं मिलने पर पार्टी छोड़ देते हैं और वो निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उठते हैं, हालांकि कई ऐसे नेता भी हैं जो किसी और पार्टी में जाकर टिकट लेकर चुनाव लड़ते हैं.पिछले दिनों महाराष्ट्र में ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता विपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बेटे को टिकट नहीं दिए जाने से नाराज होकर पार्टी छोड़ दी. उनके पार्टी छोड़ने से पहले विखे पाटिल के बेटे सुजय विखे पाटिल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए.

माना जा रहा है कि अहमदनगर लोकसभा सीट पर टिकट नहीं मिलने से सुजय बीजेपी में शामिल हो गए

बाद में उनके पिता ने भी कांग्रेस छोड़ दिया. सिर्फ महाराष्ट्र ही बल्कि अन्य राज्यों में भी टिकट नहीं दिए जाने पर नेताओं की नाराजगी की खबरें लगातार आ रही हैं.